छत्तीसगढ़

विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 1971 के युद्ध में जीता था भारत

मो. फारूक की रिपोर्ट 📝

दुर्ग (खबर वारियर)- आज 16 दिसंबर है और आज का दिन देशभर में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज ही के दिन सन 1971 की लड़ाई में भारतीय सेना ने अपने अदम्य साहस व पराक्रम का परिचय देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अपनी जीत दर्ज की थी और बांग्लादेश(ईस्ट पाकिस्तान) को पाकिस्तान से अलग कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस जंग में भारतीय सेना का हिस्सा रहे रिटायर्ड फौजियों ने इस जीत को भारतीय इतिहास में गौरव का दिन बताया है।

भारतीय सेना में एयरफोर्स का हिस्सा रहे के.मुरलीधरन, नेवी के अफसर अरुण कुमार नाग तथा आर्मी के नायक ज्योतिर्मय दत्ता ने चर्चा करते हुए 1971 के जीत को देश के लिए गौरव का विषय बताया है इन सेना नायकों ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों तथा संसाधनों के अभाव में भी भारतीय सेना ने ना सिर्फ पाकिस्तान की सेना को घुटने टेकने पर मजबूर किया वरन बांग्लादेश को भी पाकिस्तान से आजादी दिलाई और स्वतंत्र राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सेना के इन रिटायर फौजियों ने देश के युवा युवाओं से भी देश की सेवा में समर्पण भाव से काम करने का आह्वान किया है।

1971 के युद्ध के दौरान भारतीय एयरफोर्स का हिस्सा रहे के. मुरलीधरन नायर नें भारतीय सेना के इतिहास में इस युद्द को महत्वपूर्ण युद्ध बताया और कहा कि भारत को मजबूरीवश इस युद्ध में हिस्सा लेना पड़ा था क्योंकि पाकिस्तानी सेनाओं की बर्बरता की वजह से लाखों लोग बांग्लादेश की सीमा पार कर भारत में आ रहे थे। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) की मदद के लिए भारतीय की तरफ से 11 एयर फील्ड नें अटैक किया था और 13 दिनों तक चले इस युद्ध में पाकिस्तान के हजारों सेनाओं को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए थे।

नेवी अफसर अरुण कुमार नाग के अनुसार इस युद्ध में नेवी नें भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था और युद्ध के दौरान कई किलोमीटर समुद्री एरिया को सील कर दिया गया था ताकि पाकिस्तान और बांग्लादेश के तरफ से किसी भी शीप या बोट को भारतीय सीमा में आने से रोका जा सके। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी सेना के साथ मिलकर भारत नें पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की थी और उस दौरान सीमित संसाधनों के बावजूद भारत ने इस युद्ध में अपनी जीत दर्ज की और बांग्लादेश को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इस जीत के बाद बांग्लादेश ने भी भारत का दिल से शुक्रिया अदा किया।

वहीं भारतीय आर्मी के नायक ज्योतिर्मय दत्ता ने भी कहा कि मुश्किल हालात मैं भी सेना ना सेना में अपना दायित्व निभाया था और बहुत बड़ी जीत दर्ज की थी उन्होंने भी युवाओं से देश के प्रति समर्पण भाव से कार्य करने की अपील की।

1971 के युद्ध में भारतीय सेना के तीनों टुकड़ियों का हिस्सा रहे ये रिटायर्ड फौजी वर्तमान में ‘ छत्तीसगढ़ सैनिक सेवा संघ’ में कोर मेंबर के रूप में मार्गदर्शन देने का कार्य कर रहे हैं।

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