धर्म का इस्तेमाल सरकारों का विरोध करने या सत्ता हथियाने के लिए एक राजनीतिक औजार के रूप में नहीं करना चाहिए

इंटरनेशनल (खबर वारियर)- इण्डोनेशिया के वर्तमान राष्ट्रपति Joko (Jokowi) Widodo ने कहा था कि “उनके जीने के मिशन का पहला कदम यह होगा कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि धर्म उनके लिए प्रेरणास्रोत बने ना कि महत्वाकांक्षा पूरी करने का माध्यम। धर्म का इरस्तेमाल में तो सरकार का विरोध करने और ही सता हथियाने या किसी अन्य उदेश्य की प्राप्ति के लिए एक राजनैतिक-औजार की तरह करना चाहिए मुख्यत: धर्म का प्रयोग अच्छाई और शांति जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए।

धर्म की शांति, विकास और स्थायित्व को बढ़ावा देने में बहुत बड़ी देन है । इसका इस्तेमाल लोगों के अधिकारों और उनकी गरिमा को समाप्त करने या उन्हें इनसे वंचित करने से आत्मकेंद्रित और निहित स्थायी के लिए नहीं करना चाहिए। दुर्भाग्य से, यह देखा गया है कि कुछ लोग और संग अपनी धार्मिक विचारधाराओं और सिद्धांत की गलत व्याख्या कर रहे है ताकि वे धन सम्पत्ति प्राप्त कर सके, राजनैतिक विजय प्राप्त कर सके, अपनी इच्छा और जरूरत पूरी कर सके, भाई-भतीजावाद और दुश्मनी के बीज बो सके जिसके कारण कभी भूलने वाले भौतिक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाए जा सके। अगर इन्हें भारतीय परिपेक्ष्य में देखें तो मामला गंभीर हो जाता है योकि भारतीयों में धर्म की असीम आस्था होने के कारण ये अत्यधिक भावना हो जाते हैं।

“विभिन्न समाजो का निर्माण करने और एक स्वस्थ व परस्पर मजबूत समाज को कायम करने में सहायक होता है। सभी धर्म समान है। किसी भी धर्म को दूसरे धर्मों से उत्तम नही मानना चाहिए। इस पूरी दुनिया को एक ऐसे बड़े धड़ की तरह मानना चाहिए जिसमें मुसलमानों, प्रोटेस्टेंट – कैथोलिक ईसाइयों, हिन्दुओं, बौद्धों इत्यादि के लिए कामरे है। इन सभी धर्मों के अपने-अपने कमरे है तथा इन्हें एक दूसरे की निजता का सम्मान करना चाहिए जो एक दूसरे के प्रति सम्मान होता है तो इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कोई भी डरा हुआ नहीं महसूस कर रहा है। भारत में लगभग 130.26 करोड़ लोग बसते हैं जो विभिन्न धर्मों जैसे हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई इत्यादि से संबंधित है। उन्हें विभिन्न जातियों, परंपरा संस्कृतियों और सभ्यताओं से आगे की सोचनी पाहिए और एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए।