मनरेगा घोटाला: रोजगार सहायक ने लिया पैसा, नोटिस मजदूरों को

(दुर्ग से गुलाब देशमुख की रिपोर्ट)

दुर्ग (खबर वारियर) दुर्ग विकासखंड के ग्राम अंडा में मनरेगा के तहत हुए घपले में मामला का भंडाफोड़ होने पर जनपद पंचायत दुर्ग में जिन मजदूरों के बैंक खाते में बिना काम के पैसा डाला गया था उनके बयान दर्ज होने के बाद पैसा वापस करने का नोटिस जारी हुआ है,जिसे वो पहले ही रोजगार सहायक को दे चुके हैं। अब पूरे वााकये से ये शंका उत्पन्न होने लगी है कि जनपद पंचायत के अधिकारी कहीं मजदूरों से पैसे वापस करा कर प्रकरण को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी में तो नहीं है।

मामले में गांव के व्यक्ति तेजराम चौहान की शिकायत पर मजदूरों एवं रोजगार सहायक से लिये गये बयान में स्पष्ट हुआ की धांधली हुई है, मजदूरों ने बयान में कहा की हमने कोई काम ही नहीं किया हमारे खाते में पैसा डाला गया वह भी जबरदस्ती। फिर उस पैसे को रोजगार सहायक गोवर्धन जोशी ने ले भी लिया ।

मजगूरों ने बताया कि ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत में अधिकारियों ने बयान दर्ज कराए हमें लगा रोजगार सहायक से वसूली की जाएगी लेकिन उल्टा हमें ही पैसा वापस करना है जिसका नोटिस भी मिल गया है।

ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक को बचाया जा रहा❓

ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक गोवर्धन जोशी ने मटेरियल के नाम पर इन मजदूरों के खाते में पैसा जमा करवाकर नाटकीय तरीके से निकलवा लिया और कुछ पैसा मजदूरों को चाय पानी के लिए दे दिया।
गांव के आवेदक तेज राम चौहान को मिले सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेजों में साबित भी हुआ। इस प्रकरण में शिकायतकर्ता तेजराम चौहान को बड़े-बड़े नेताओं का फोन आने लगा था उसके बाद भी उक्त व्यक्ति ने हार नहीं मानी और भ्रष्टाचार को उजागर कर दम लिया। लेकिन सरकारी सिस्टम में जांच हुई कार्रवाई की उम्मीद भी हुई लेकिन उम्मीद धरी की धरी तब रह गई जब उल्टा मजदूरों को पैसा वापस करने का नोटिस मिल गया।

यहां पर बताना लाजमी है कि रोजगार सहायक ने भी पैसा लिया और जनपद पंचायत अब नोटिस जारी कर पैसे वसूलने की तैयारी में है। लेकिन जांच अधिकारी रोजगार सहायक पर आंच नहीं आने दे रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में मजदूरों का प्रशासन से विश्वास ही उठ गया मानो “सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का।”

सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को पलीता लगाने वाले रोजगार सहायक तो निश्चिंत होकर अपना काम कर रहे हैं लेकिन मजदूरों की रातों की नींद उड़ गई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के समय में भी इस तरीके से मजदूरों के बैंक खातों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है अब ऑनलाइन बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम भी ग्राम पंचायत अंडा में फेल हो गया।

इस मनरेगा के धांधली में पूर्व और वर्तमान सरपंच, सचिव की भूमिका भी संदेहास्पद प्रतीत होता है। बिना सरपंच सचिव के इस तरह के फर्जीवाड़े और धांधली को अंजाम देना मुश्किल है, बहर हाल मजदूरों पर गाज  तो गिर ही गई  है।

पूरे प्रकरण का खुलासा होने व किसानों को दिए गए नोटिस के सवाल पर जनपद के सभापति-संचार संकर्म समिति,टिकेश्वरी देशमुख का कहना है कि- सरकार का पैसा सही हाथों में पहुंचना चाहिए रोजगार सहायक पर कार्रवाई होनी चाहिए यह नोटिस दुर्भाग्यपूर्ण है।मामले को सामान्य प्रशासन की बैठक में उठाएंगे।