परंपरागत आंदोलनों के अलावा किसानों और मजदूरों को संघर्ष की रणनीति बदलनी होगी

दुर्ग(khabar warrior) – केंद्रीय ट्रेडयूनियनों और राष्ट्रीय संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने आज शहीद चंद्रशेखर आजाद के शहादत दिवस के अवसर पर तीर्थराज पैलेस में किसान मजदूर एकता दिवस मनाया, इस अवसर पर कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन की ओर से अध्यक्ष आई के वर्मा, बद्रीप्रसाद पारकर, कल्याण सिंह ठाकुर, सीटू की ओर से शांतकुमार, डी व्ही एस रेड्डी, एक्टू की ओर से बृजेंद्र तिवारी, श्याम लाल साहू ने संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबी केंद्र की मोदी सरकार ने संसद में बहुमत को अस्त्र और तीन कृषि कानून, चार लेबर कोड के शस्र से हमला कर दिया है।

तीन माह के ऐतिहासिक किसान आंदोलन का सरकार पर कोई असर नहीं हुआ है और सरकार आंदोलन को कुचलने के लिये दमन का सहारा ले रही है, अनर्गल और निराधार आरोप लगाकर आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है, जिस प्रकार सीएए के खिलाफ आंदोलन में मुस्लिमों को निशाना बनाया गया था ,उसी प्रकार किसान आंदोलन के नेतृत्व के लोगों और समर्थकों को राष्ट्रद्रोह और सुरक्षा अधिनियम में बंदी बनाया जा रहा है।

असहमति की आवाज को कुचलने के लिये सोशल मीडिया के नियमों में बदलाव किये गये है, वक्ताओं का मानना है कि किसानों और मजदूरों को एकजुट करना होगा और परंपरागत आंदोलन के अलावा संघर्ष की रणनीति में बदलाव करते हुए असम और बंगाल जैसे चुनावी राज्यों को केंद्रित करना चाहिये।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच के संयोजक एड. राजकुमार गुप्त ने कहा खेत से किसानों को और उद्योगों से मजदूरों को बाहर करने की नीयत से तीन कृषि कानून और चार लेबर कोड बनाये गये हैं ताकि मानव श्रम के स्थान पर आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस और रोबोट के माध्यम से कृषि और औद्योगिक उत्पादन किया जा सके और कार्पोरेट को लाखों करोड़ का मुनाफा अर्जित करने का अवसर मिले।

किसान मजदूर एकता दिवस में छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संतु पटेल, हुकूम सिंह दिल्लीवार, जैतराम साहू, वेदनाथ हिरवानी, सीटू के एम आर पाटिल, एक्टू के अशोक मिरी, दीनानाथ प्रसाद, छत्तीसगढ़ श्रमिक मंच के सुभायु दास, पूरनलाल साहू, सुमित डहरे, भगतराम, कुंवर सिंह, कृष्णा साहू और नरेश वर्मा शामिल थे ।