कोरोनाकाल में सेवा देने वाले सैंकड़ो योद्वाओं को थमाया सेवा समाप्ति का नोटिस

बलौदाबाजार, दुर्ग, बालोद जिले से सैकड़ो हुए सेवा मुक्त
रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ राज्य में कारोना काल में स्वास्थ विभाग के प्रदेश स्थित सभी जिलों में ‘‘आपदा मोचन निधि‘‘ के तहत अस्थाई रूप से अधिकारी, कर्मचारी, नर्सो की नियुक्तियां 6 माह पूर्व की गई थीं। बलौदाबाजार जिले में ऐसे कर्मचारियों की सेवाएं 31 मार्च से समाप्त किए जाने का नोटिस मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी बलौदाबाजार द्वारा जारी किया गया है। इससे नाराज स्वास्थ कर्मचारियों ने बलौदाबाजार में प्रदर्शन कर कलेक्टर बलौदाबाजार को ज्ञापन सौपा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध ने प्रदेश में कोरोना योद्वाओं के साथ ‘‘यूस एण्ड थ्रो‘‘ की की नीति की निंदा की है। संध को ऐसी जानकारी मिली है कि ऐसे ही सेवा समाप्ति का फरमान् दुर्ग व बालोद जिले में भी की गई है।
संध के प्रांताध्यक्ष विजय कुमार झा, जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन, प्रांतीय उपाध्यक्ष अजय तिवारी एवं स्वास्थ संयोजक संध के प्रांतीय अध्यक्ष टार्जन गुप्ता ने प्रदेश के लाखों शासकीय सेवकों द्वारा प्रदेश में कोरोना संकटकाल में अपने प्राणों की बाजी लगाकर सेवा प्रदान की है। माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बधेल ने बजट भाषण में बेरोजगारी दूर करने का प्रयास करने की सदन में धोषण की है। प्रदेश के स्वास्थ अधिकारी सरकार को बदनाम करने बेरोजगारी दूर करना तो दूर बेरोजगारी बढ़ा रहे है। संध के बलौदाबाजार प्रतिनिधियों ने चर्चा की तो उनका जवाब है कि स्वास्थ मंत्री का कहना है कि ‘‘आपदा समाप्त-सेवा समाप्त‘‘ होगा।
इन्हें सेवा रखने से समस्या उत्पन्न होगी। दूसरी ओर स्वास्थ विभाग में नई भर्तीयां की जा रही है। बलौदाबाजार जिले में 6 माह से संविदा नियुक्त में 14 लैब टैक्निशियन, 70 स्टाफ नर्स को 31 मार्च से सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया है। कर्मचारी संध ने क्षेत्रीय विधायक व संसदीय सचिव चन्द्रदेव राय, विधायक शकुंतला साहू, विधायक प्रमोद शर्मा को प्रदर्शन उपरांत नियमितिकरण हेतु मांग पत्र सौपा है। यदि 31 मार्च को सेवाएं समाप्त की जाती है तो तत्काल राजधानी में धरना प्रदर्शन करने हेतु कर्मचारी संध बाध्य होगा। बलौदाबाजार जिले की भाॅति ऐसे ही सेवा समाप्ति की कार्यवाही दुर्ग व बालोद जिले में भी की जा रही है।
कोविड-19 महामारी के रोकथाम के लिए इन कोरोना योद्वाओं की नियुक्ति 06 माह के लिए की गई थीं। अधिकारियों की माने तो क्या प्रदेश में कोरोना ‘‘आपदा‘‘ समाप्त हो गया है और इन योद्वाओं की जरूरत् अब नहीं है। वास्तविकता यह है कि अभी वैक्सीन लगाने में भी इनकी महती भूमिका है। जब विभाग में पद रिक्त है तब इन्हें समायोजन किए जाने के बदले सेवा समाप्ति का फरमान् जारी करना ‘‘कोरोना योद्वाओं का अपमान्‘‘ है।

संध के महामंत्री उमेश मुदलियार, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रांतीय कोषाध्यक्ष रविराज पिल्ले, विमल चंद्र कुण्डू, विश्वनाथ ध्रुव, प्रांतीय सचिव अमर मुदलियार, नरेश वाढ़ेर, रामचंद्र ताण्डी, जिला कोषाध्यक्ष जवाहर यादव, संभागीय उपाध्यक्ष आलोक जाधव, स्वास्थ संयोजक संध के प्रांतीय सचिव प्रवीण ढिडवंशी, मिडिया प्रभारी हरीश सन्नाट, महामंत्री आर.के.अवस्थी, उपप्रातांध्यक्ष मिर्जा कासिम बेग, हरिश जायसवाल, रेजीना तिर्की, प्रांतीय सह सचिव मो.जहांगीर, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष सरोज बाधमार, सेवती साहू, रमशीला साहू, के.रिजवी, प्रचार प्रसार मंत्री प्रकाश सिन्हा, प्रवक्ता देवराज विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष आर.के.शर्मा आदि ने नियमितिकरण न कर सेवा समाप्ति करने की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बधेल व स्वास्थ मंत्री टी.एस.सिंहदेव से ऐसे बेलगाम अधिकारियों पर नियंत्रण करने व चुनावी धोषणा पत्र में किए गए वादे के विपरित कार्य करने वालों से सावधान रहने की अपील की है।



