उच्च न्यायालय के निर्देश व नियम विपरित पदोन्नति से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नाराज

रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ़ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने आरोप लगाया है कि कृषि विभाग में निरीक्षकों की आड़ लेकर पदोन्नति में जुगाड़ किया जाकर आपदा में अवसर तलाश किया जा रहा है। कृषि विभाग मेें ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत तकनीकी अनुसंधान केन्द्रों तक पहुंचकर कृषकों की समस्याओं का निदान करने, सुरक्षित भण्डारण करने, हेतु मैदानी स्तर पर शासन द्वारा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की पदस्थापना की गई है।

इनके कार्यो के पर्ववेक्षण हेतु प्रत्येक 06 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के उपर 01 कृषि विकास अधिकारी एवं विकास खण्ड स्तर प्रमुख वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी की पदस्थापना है। इनके पदोन्नति की प्रक्रिया में उच्च अधिकारियों ने अपने स्वेच्छाचारिता से भर्ती नियम व पदोन्नति में संशोधन कर दिया। इसके विरूद्व संध द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई।

माननीय उच्च न्यायालय ने शासन को पदोन्नति नियम व भर्ती का नियम का कड़ाई से पालन करने हेतु निर्देशित भी किया है। किंतु अधिकारी उच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरित 235 स्नातक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के पदोन्नति आदेश कल 29 मई को जारी कर दिए। इसके विरूद्व 06 जून को माननीय उच्च न्यायालय प्रारंभ होने पर न्यायालय की शरण में पुनः जाने की तैयारी की जा रही है।

संध के प्रांतीय अध्यक्ष एम.पी.आड़े एवं तृतीय वर्ग कर्मचारी संध प्रांतीय अध्यक्ष विजय कुमार झा ने बताया है कि नियम विरूद्व पदोन्नति प्रक्रिया के विरोध में 26 दिसंबर 2020 से 12 जनवरी 2021 तक प्रदेश के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने 18 दिनों तक लंबा आंदोलन कर राजधानी में धरना प्रदर्शन किया था। शासन व संचालक के आश्वासन पर आंदोलन वापस लिया गया था। किंतु पदोन्नति नियम में वरिष्ठता सह उपयुक्तता के विपरित केवल योग्यता के आधार पर स्नातक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को कृषि विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया है।

गैरस्नातक किंतु पदोन्नति प्राप्त कृषि विकास अधिकारियों से 8-10 वर्षो से वरिष्ठों को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया है। स्वयं विभाग द्वारा 4 दिसंबर 2018 को किए गए संशोधन को दरकिनार कर मात्र कृषि स्नातक योग्यताधारियों को ही पदोन्नत किया गया अन्य संकाय के वरिष्ठ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को वंचित कर दिया गया है। विभाग द्वारा किए गए संशोधन में दोनों संवर्ग के 45-45 प्रतिशत् को पदोन्नत करने का प्रावधान है। वर्तमान् व्यवस्था के तहत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी का शत प्रतिशत पद ,वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी का 10 प्रतिशत् पद, सहायक संचालक कृषि के 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के पद है शेष पदोन्नति के द्वारा भरे जाना चाहिए। पदोन्नति हेतु छग.लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 प्रभावशील है।

विभागीय पद संरचना में मैदानी स्तर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के 3797, कृषि विकास अधिकारी के 650 पद एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के लगभग 400 पद स्वीकृत है। मैदानी स्तर पर कार्यरत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की संख्या की तुलना में पदोन्नति के पद अत्यंत कम होने के कारण 27-30 वर्षो तक कार्य करने के उपरांत भी पदोन्नति के अवसर प्राप्त नहीं हो पाते है। संचालक द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में लंबित याचिका के निराकरण तक पदोन्नति लंबित रखने का लिखत आश्वसन दिया था। किंतु गए वादे से मुकर कर आपदा में अवसर का लाभ लेकर पदोन्नति आदेश जारी कर दिया गया। इससे वरिष्ठ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों में व्यापक आक्रोष है।

कृषि विभाग का दुर्भाग्य है कि पदोन्नति नियम के विपरित कार्य करने से 33-34 वर्षो से सेवारत् 4 दिसंबर 2018 के बाद लगभग 200 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी बिना पदोन्नति प्राप्त किए सेवा निवृत्त हो गए है। वहीं जारी पदोन्नति आदेश में 10-12 वर्ष की सेवा करने वाले अस्थाई लोगों को पदोन्नत् कर दिया गया है। विभाग के उच्च अधिकारी एक साजिश के तहत भारतीय राष्टीªय कांग्रस कमेटी के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष श्री मोहन मरकाम जी, विभागीय मंत्री, अनेक सम्मानीय विधायकगणों के पत्र लिखने के बाद भी उनकी अनुशंसा के विपरित कार्य कर सरकार को बदनाम कर रहे है।

लगभग समस्त ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जो पदोन्नति से वंचित है, वे आरक्षित वर्ग के शासकीय सेवक है। संध के कार्यकारी प्रांतीय अध्यक्ष अजय तिवारी,उमेश मुदलियार महामंत्री, विजय लहरे महामंत्री, सीताराम भगत, मनोज कुमार, नलिनी चन्द्राकर, आर.एन.साहू, ओ.पी.अवस्थी, आर.सी.मालाकार, राजेन्द्र वर्मा आदि नेताओं ने तत्काल आरक्षित वर्गो के शासकीय सेवकों के हितार्थ जारी पदोन्नति आदेश को निरस्त करने की मांग मुख्यमंत्री भूपेश बधेल, कृषि मंत्री रविन्द्र चैबे से की है।