आई.आई.टी. हैदराबाद ने फंगल संक्रमण के इलाज के लिए एम्फोटेरिसिन-बी टेबलेट विकसित की

हैदराबाद(खबर वारियर)- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-आईआईटी हैदराबाद ने कोविड के बाद होने वाले फंगल संक्रमण के उपचार के लिए नैनो फाइबर आधारित टेबलेट एम्फोटेरिसिन विकसित की है। इस टेबलेट को आमतौर पर एएमबी कहा जाता है। अभी एएमबी इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। आईआईटी हैदराबाद के अनुसंधान कर्ताओं ने अपने इस अविष्कार को बौद्धिक संपदा अधिकार के दायरे से मुक्त रखने का निश्चय किया है।
इस तरह इस सस्ती और प्रभावी दवा का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है। आईआईटी के रसायनिक इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर सप्तऋषि मजूमदार और डॉ. चन्द्र शेखर शर्मा ने दो साल पहले अनुसंधान कर बताया था कि नैनो फाइब्रोस एएमबी कालाआजार के उपचार में प्रभावी है।
मुख्य बिंदु
- IIT हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को बौद्धिक संपदा अधिकारों (intellectual property rights) से मुक्त रखने का फैसला किया और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए तैयार है ताकि बड़े स्तर पर इस टैबलेट का उत्पादन किया जा सके।
- यह दवा सस्ती, उच्च एएमबी अवशोषण और कम नेफ्रोटॉक्सिसिटी वाली है। AmB पहले केवल इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध थी।
एम्फोटेरिसिन बी (Amphotericin B) टैबलेट क्या हैं?
एम्फोटेरिसिन बी टैबलेट नैनो-फाइबर आधारित मौखिक दवा है जिसका उपयोग फंगल संक्रमण के इलाज के लिए किया जा सकता है जो वर्तमान में भारत में COVID उपचार के बाद फैल रहा है।
पृष्ठभूमि
केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ता दो साल पहले ओरल नैनोफिब्रस एएमबी के बारे में अध्ययन कर रहे थे और इसे काला अजार (Kala Azar) के लिए प्रभावी पाया। काला अजार को ठीक करने के लिए एम्फोटेरिसिन बी की नैनोफाइबर मौखिक गोलियां बनाने का यह पहला प्रयास था।
एम्फोटेरिसिन बी (Amphotericin B)
यह एक एंटिफंगल दवा है जिसका उपयोग गंभीर फंगल संक्रमण और लीशमैनियासिस (leishmaniasis) में किया जाता है। इसका उपयोग म्यूकोर्मिकोसिस (mucormycosis), एस्परगिलोसिस (aspergillosis) कैंडिडिआसिस (candidiasis), ब्लास्टोमाइकोसिस (blastomycosis), क्रिप्टोकॉकोसिस (cryptococcosis) आदि के इलाज के लिए किया जाता है। यह दवा आमतौर पर नस में इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती है। इस दवा के सामान्य दुष्प्रभावों में गुर्दे की समस्याओं के अलावा बुखार, ठंड लगना और सिरदर्द शामिल हैं। यह गर्भावस्था में भी सुरक्षित है।
म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस
यह कम प्रतिरक्षा और संक्रमण से लड़ने में असमर्थता वाले लोगों को प्रभावित करने वाला एक गंभीर फंगस संक्रमण है। इस संक्रमण के लक्षण शरीर में संक्रमण के स्थान पर निर्भर करते हैं। यह आमतौर पर साइनस और मस्तिष्क को संक्रमित करता है जिससे बहती नाक, एकतरफा चेहरे की सूजन, दर्द, सिरदर्द और बुखार होता है।



