महंगाई भत्ते समेत अन्य मुद्दों को लेकर शालेय शिक्षक संघ करेगा 28 जुलाई को धरना प्रदर्शन

रायपुर(khabar warrior)- शालेय शिक्षक संघ 28 जुलाई को महंगाई भत्ता सहित अन्य मांगों को लेकर पूरे प्रदेश में एक दिवसीय धरना देते हुए सभी जिला मुख्यालयों में मुख्यंमत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौपेंगे। यह निर्णय संगठन की प्रांतीय वर्चुअल बैठक में लिया गया है।

शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि कोविड की शुरुवात से ही शासन ने महंगाई भत्ते पर रोक लगाए हुए है. पर केंद्र सरकार के महंगाई भत्ते को 28% करने की घोषणा के बाद से ही राज्य के कर्मचारियों को आस बंधी थी की राज्य शासन भी सभी लंबित महंगाई भत्तों को देने की घोषणा करेगी पर मंत्री परिषद की बैठक में इस संबंध किसी भी प्रकार का निर्णय नही लेने से राज्य के सभी कर्मचारी अधिकारी आक्रोशित है।

साथ स्थांतरण नीति, सहायक शिक्षको के वेतन विसंगति , क्रमोन्नति, अनुकम्पा नियुक्ति, पूर्व सेवा अवधि की गणना, छुट्टी नगदीकरण, उपादान राशि, संस्था प्रमुख के पद पर पदोन्नति आदि विषयों पर भी निर्णय नही लेने के कारण शालेय शिक्षक संघ ने 28 जुलाई को एक दिवसीय वर्चुअल धरना प्रर्दशन देते हुए जिला के पदाधिकारी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ज्ञापान सौंपने का फैसला किया है।

प्रदेश में विगत 2 वर्षों से 16% महंगाई भत्ता लंबित है जुलाई 2019 से 5% जनवरी 2020 से 4% जुलाई 2020 से 3% एवं जनवरी 2021 से 4 % महंगाई भत्ता लंबित है केंद्र की घोषणा के बाद राज्य मंत्री परिषद की बैठक में महंगाई भत्ते को बहाल करने निर्णय शासन शासन करेगी पर महंगाई भत्ते पर किसी भी प्रकार का निर्णय नही लेने से अधिकारी कर्मचारी आक्रोशित है और महंगाई के कारण उनका पूरा परिवार निराश एवं परेशान है। दाउ खूबचंद बघेल की जयंती कार्यक्रम में मुख्यंमत्री अपने संबोधन में कहा है कि कोविड काल मे भी राज्य का विकास अपनी पूरी गति से हो रहा है कही कोई बाधा नही है फिर राज्य के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अविलंब प्रदान किया जाना चाहिए ।

राज्य के कर्मचारी एवं अधिकारी, मंत्री परिषद की बैठक में स्थानांतरण नीति की घोषणा के संबंध में भी निर्णय लिए जाने के इंतिजार में थे पर शासन ने स्थानांतरण नीति पर भी कोई निर्णय नही लिया है, मध्य प्रदेश की भांति यहाँ भी विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष स्वयं के व्यय पर स्थानांतरण नीति को लागू किया जाना चाहिए।

शासन में आने के पूर्व कॉंग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में वेतन विसंगति, क्रमोन्नति, शिक्षक पंचायत संवर्ग के मृत शिक्षको के परिवार अनुकंपा नियुक्ति, आदि कई मागों को पूरा करने का वादा किया गया था परंतु ढाई वर्ष होने के बाद भी किसी मांगों को पूरा नही किया गया है।

संविलियन प्राप्त होने के बाद भी शिक्षा विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों द्वारा संविलियन प्राप्त शिक्षकों को भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। राजपत्र में स्पष्ट होने के भी पदनाम के साथ एलबी शब्द का प्रयोग करके शिक्षा विभाग ने अलग एवं नीचा दिखाने का कार्य किया जा रहा है। पूर्व सेवा की अवधि की गणना नही किये जाने से करोना के कारण मृत शिक्षक साथियों को छुट्टी नगदीकरण, उपादान का लाभ नही दिया जा रहा है शासन ने इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नही किया है।

प्रदेश के प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में संस्था प्रमुख एवं शिक्षकों के हजारों पद रिक्त है । इन पदों पर सहायक शिक्षको को पदोन्नति देकर बहुत से शिक्षकों का वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है पर शासन द्वारा इस पर भी किसी भी प्रकार का निर्णय नही लिया जा रहा है।

2004 से पुरानी पेंशन योजना को बंद करके शेयर बाजार आधारित एन पीएस योजना को अधिकारी कर्मचारियों पर थोप दिया गया था। प्रदेश के अधिकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित कराते आ रही है पर राज्य शासन इस पर कोई निर्णय नही ले रही जिससे राज्य के कर्मचारी अधिकारी निराश है।

प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में महासचिव धर्मेश शर्मा,कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी,उपाध्यक्ष सुनील सिंह,विष्णु शर्मा,डॉ सांत्वना ठाकुर,प्रदेश प्रवक्ता गजराज सिंह आदि ने बताया शालेय शिक्षक संघ ने शासन को उपरोक्त मांग पर ध्यान आकर्षण कराने 28 जुलाई को धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन सौंपा जाएगा।

बैठक में सहसचिव सत्येंद्र सिंह,सन्गठन मंत्री विवेक शर्मा, राजेश शर्मा, जितेंद्र गजेंद्र,घनश्याम पटेल,अतुल अवस्थी,अजय वर्मा, जिलाध्यक्षगण प्रहलाद जैन,शिवेंद्र चंद्रवंशी, जितेंद्र शर्मा, सन्तोष मिश्रा,दिनेश राजपूत, कुलदीप सिंह,शैलेष सिंह, प्रदीप पांडेय, रवि मिश्रा, संतोष शुक्ला, विनय सिंह, हिमन कोर्राम, दीपक वेंताल, भोजराज पटेल,भानु प्रताप डहरिया,यादवेंद्र दुबे, उपेंद्र सिंह,जोगेंद्र यादव,विनय सिंह, सर्वजीत पाठक, ओमप्रकाश खैरवार,कृष्णराज पांडेय, आदि है।