“कही-सुनी”:- वरिष्ठ पत्रकार रवि भोई की कलम से

 (25 JULY-21)

“कही-सुनी”

   रवि भोई✍️


मंत्री जी ने तलवार से काटे केक

मंत्री हैं तो जन्मदिन का जश्न मनाया जाना ही था। जन्मदिन पर कई केक काटे गए, वह भी तलवार से। दोनों हाथों से तलवार लहराते मंत्री जी केक काटते रहे और कोरोना प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ती रही।

छत्तीसगढ़ में किसी मंत्री के जन्मोत्सव में ऐसा नजारा लोगों को पहली बार देखने को मिला। मंत्री न रहते लोगों को जन्मदिन भी याद न होगा, पर मंत्री की ताकत, पद-प्रतिष्ठा और कार्यकर्ताओं की मांग का कुलांचे भरना स्वाभाविक है।

मंत्री जी को भूपेश कैबिनेट से बाहर करने की चर्चा गाहे-बगाहे हो ही जाती है। कहते हैं पिछले ढाई साल में जब भी मंत्री जी को हटाने की खुसुर-पुसुर हुई तो वे रैली के जरिये अपनी ताकत दिखाने निकल पड़ते हैं, अब तक कई काम मन के मुताबिक करने के बाद भी मंत्री जी का जलवा बरकरार है। मंत्री जी का विधानसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री जी के गृह जिले में ही आता है।

रोहिंग्या शरणार्थियों पर जागी सरकार

सरगुजा के महामाया पहाड़ी में रोहिंग्या शरणार्थियों के बसने के मुद्दे पर अब सरकार जागी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कलेक्टर संजीव कुमार झा ने जाँच -पड़ताल के लिए छह अफसरों की टीम गठित की है। बंगाल और बिहार के निवासी बनकर वन क्षेत्र में बसे रोहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा सबसे पहले भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने नगर निगम की सभा में उठाया था। कहते हैं एक नेता ने अपने वोट बैंक मजबूत करने के लिए एक वर्ग विशेष के लोगों को बसाया, जिसमें ये भी आ गए।

इस मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कलेक्टर को और केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। अब जाँच के बाद वास्तविकता का खुलासा होगा।

मानसून सत्र के गर्म रहने के आसार

सोमवार 26 जुलाई से शुरू हो रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र हंगामेदार होने की चर्चा है। पांच दिन के सत्र में विपक्ष राज्य में धर्मांन्तरण, सरकारी खरीद केंद्रों में धान ख़राब होने का मुद्दा, खाद-बीज की कमी और कोरोनाकाल में सरकार की व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। हंगामे की वजह से बजट सत्र निर्धारित समय तक चल नहीं सका था।

सरकार ने विपक्ष की अनुपस्थिति में विभागों का बजट पारित करवा लिया था। कांग्रेस भी जासूसी, केंद्र से खाद न मिलने और वैक्सीनेशन के लिए पर्याप्त टीके न मिलने को मुद्दा बना सकती है। छोटे सत्र में भी बड़े काम और हंगामेदार होने के आसार व्यक्त किये जा रहे हैं।

अब सबकी निगाह विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत पर टिकी है कि वे सत्र का सुचारु संचालन किस तरह करते हैं ?

खेतान का छक्का

छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल के अध्यक्ष सीके खेतान ने जाते-जाते लाफार्ज सीमेंट कंपनी पर 196 करोड़ रुपए से अधिक की पेनाल्टी लगाने का फैसला देकर क्रिकेट मैच की तरह आखिरी ओवर में छक्का लगा दिया। सीके खेतान 31 जुलाई को रिटायर होने वाले हैं। रिटायरमेंट के पहले 20 साल पुराने लंबित केस में कठोर और शासन के हित में फैसला देकर सुर्ख़ियों में आ गए हैं।

राजस्व मंडल के अध्यक्ष तौर पर डीएस मिश्रा ने एक कंपनी को राहत दे दी थी, जिसके चलते वे आखिरी दिनों में विवादों में आ गए थे। कहा जा रहा है खेतान ने डीएस मिश्रा मामले से सबक लेते हुए दया-दृष्टि की जगह सख्ती दिखाई।

डीएस मिश्रा और खेतान दोनों ही आखिरी दौर में राज्य के मुख्य सचिव की रेस से बाहर हो गए थे।कहते हैं राजस्व मंडल के फैसले के दाग के कारण डीएस मिश्रा को रिटायरमेंट के बाद पद पाने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ी। यह अलग बात है कि वे पहले राज्य सहकारी निर्वाचन आयोग के आयुक्त रहे , फिर विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष बन गए।

ट्रिगर बिलासपुर से

सरगुजा छत्तीसगढ़ का एक बड़ा संभाग है, पर सरगुजा संभाग के कमिश्नर का काम बिलासपुर के कमिश्नर डॉ. संजय अलंग अतिरिक्त रूप से देख रहे हैं और आईजी रेंज का जिम्मा बिलासपुर के आईजी रतनलाल डांगी के पास है। बस्तर की तरह सरगुजा भी राज्य का ट्राइबल इलाका है और फैला हुआ है। बड़े और महत्वपूर्ण संभाग में कमिश्नर और आईजी की तदर्थ व्यवस्था लोगों को समझ में नहीं आ रहा है।

अफसरों की कमी के चलते ऐसा करना पड़ा है या फिर राजनीतिक दृष्टिकोण से। सरगुजा इलाके में दखल रखने वाले मंत्री टीएस सिंहदेव और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच नरम-गरम की ख़बरें चर्चा में है। ऐसे में कहा जा रहा है कि शायद मुख्यमंत्री को सरगुजा के लिए बिलासपुर से ट्रिगर दबाना मुफीद लग रहा हो।

कैबिनेट में सिंहदेव की गैरमौजूदगी

20 जुलाई को हुई भूपेश बघेल कैबिनेट की बैठक में मंत्री टीएस सिंहदेव की गैरमौजूदगी राज्य में चर्चा का विषय बन गया है और इसे नई सियासत के तौर पर देखा जाने लगा है। कहते हैं कैबिनेट की बैठक के दिन टीएस सिंहदेव रायपुर में थे , फिर भी वे कैबिनेट में नहीं दिखे ।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के संबंधों में खटास की चर्चा काफी दिनों से हो रही है। सिंहदेव ने मुख्यमंत्री के कुछ फैसलों के इतर अपनी राय भी जाहिर कर चुके हैं। इस कारण सिंहदेव के कदम से सियासी पारा चढ़ जाता है।

पिछले दिनों टीएस सिंहदेव दिल्ली गए, तो कयासों का बाजार गर्म हो गया। पंजाब के घटनाक्रम के बाद कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ की सियासत पर भी लोगों की निगाह है।

लाटरी खुलने के इंतजार में कांग्रेस नेता

कहा जा रहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद बचे हुए निगम-मंडलों में कांग्रेस नेताओं की नियुक्ति हो जाएगी। तीसरी और चौथी लिस्ट में जिस तरह चौंकाने वाले नाम आए, उसको देखते हुए पांचवीं लिस्ट में अप्रत्याशित लोगों को पद मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। अभी बचे हुए निगम-मंडलों में सीएसआईडीसी, वेबरेज कार्पोरेशन और मार्कफेड महत्वपूर्ण हैं।

अगस्त में अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष का पद भी रिक्त हो जायेगा। सरकार ने पूर्व विधायक कमला मनहर को उपाध्यक्ष बनाकर मंत्री का दर्जा दे दिया है, माना जा रहा है कि, वही अध्यक्ष बन जाएंगी। निगम-मंडल में पदाधिकारी के लिए आरपी सिंह, अजय साहू और कई नेताओं के नाम काफी समय से चर्चा में हैं। अब देखते हैं इन नेताओं की लाटरी कब खुलती है?

कुछ आईएएस होंगे इधर-उधर

कहा जा रहा है कि जुलाई के आखिरी सप्ताह में शीर्ष स्तर पर कुछ आईएएस अफसरों की पदस्थापना में हेरफेर हो सकता है। 31 जुलाई को राजस्व मंडल के अध्यक्ष सीके खेतान रिटायर हो रहे हैं , सरकार को उनकी जगह किसी की पोस्टिंग करनी पड़ेगी। जनसंपर्क विभाग के सचिव का प्रभार अभी तक किसी को नहीं सौंपा गया है , वहीँ सरगुजा संभाग में कमिश्नरी का काम भी प्रभार पर चल रहा है।

राजस्व मंडल के अध्यक्ष का पद मुख्य सचिव के स्तर का है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन के अलावा राज्य में मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी रेणु पिल्लै और सुब्रत साहू हैं। प्रमुख सचिव रहते केडीपी राव मंडल के अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में किसी प्रमुख सचिव को भी पदस्थ किया जा सकता है। कहा जा रहा है मंडल अध्यक्ष के लिए रेणु पिल्लै, गौरव द्विवेदी और मनिंदर कौर द्विवेदी का नाम चर्चा में है।

(-लेखक, पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)