आभाव या प्रभाव की मित्रता टिकाऊ नही,चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति सबसे बड़ी पूंजी – मीनाक्षी वैष्णव

दुर्ग (खबर वारियर) जब तक हममें जीवन से हमें मिली सौगातों के प्रति धन्यवाद का भाव नही आएगा हम कभी खुश नही हो सकेंगे , परिस्थितियों को जिस दृष्टिकोण से देखेंगे हम वही महसूस करने लगते हैं , संसार की रचना में समता का भाव है सबके लिए चुनौतियां भी और अवसर भी कोई धन से सुखी है तो तन से दुखी, चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति सबसे बड़ी पूंजी है।
ग्राम चंगोरी में चल रहे भागवत कथा के सुदामा चरित्र के भाव में उक्त बातें कहते हुए कथा वाचिका मीनाक्षी वैष्णव ने सुदामा चरित्र, दत्तात्रेय कथा, परीक्षित मोक्ष की कथा का भावपूर्ण विस्तार दी, उन्होंने कहा सुदामा यानि ‘स्व दामा यस्य स:सुदामा‘अर्थात अपनी इंद्रियों का दमन कर ले वही सुदामा है , मित्रता सुदामा कृष्ण जैसा होना चाहिए जहां न आभाव का भाव है और न ही प्रभाव का, निस्वार्थ रिस्ते का नाम सुदामा और सच्ची मित्रता का नाम कृष्ण है।


दत्तात्रेय महराज जी ने अपने जीवन काल में 24 गुरु बनाये, और सबसे कुछ न कुछ सिखते हुए अपने जीवन में उतारते रहे, हमें भी सिखने का भाव ताउम्र रखनी चाहिए, प्रकृति अलग अलग माध्यमों से हमें संदेश देती रहती है , जिससे प्रेरणा लेकर मानव कल्याण मे फलीभूत करना चाहिए।

कथा के अंतिम दिन परीक्षित मोक्ष कथा का वर्णन करते हुए मीनाक्षी वैष्णव ने बताया भागवत कथा मोक्षदायिनी है यानि , कथा श्रवण से हमें काम, क्रोध , लोभ, मोह, मत्सल से मुक्ति मिलती है जिससे जीवन सहज सरल हो जाता है यही मोक्ष कथा का सार है।
कथा श्रवण का लाभ लेने कथा स्थल पर पूर्व कैबिनेट मंत्री रमशीला साहू, प्रीतपाल बेल चंदन, बिष्णु प्रसाद देशमुख उपस्थित रहे, दिनेश देशमुख ने भागवत सप्ताह आयोजन में सहयोग के लिए सबका आभार किया।




