छत्तीसगढ़शहर

“गांधीवादी चिंतकों का महामंथन” :  आदिवासी समाज और प्राकृतिक संसाधन छत्तीसगढ़ की असली ताकत : राजगोपाल

जल, जंगल, जमीन, शराबबंदी और भिलाई इस्पात संयंत्र के संरक्षण पर हुई गहन चर्चा

भिलाई – प्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक एवं सर्वोदय कार्यकर्ता पी.वी. राजगोपाल 28 सितंबर को एक दिवसीय प्रवास पर भिलाई पहुंचे। अपने इस प्रवास के दौरान उन्होंने एच.एस.सी.एल. कॉलोनी, रूआबांधा स्थित आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति और जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित एक विशेष वैचारिक सत्र में भाग लिया।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के उत्थान, पर्यावरण संरक्षण, बस्तर के विकास और छत्तीसगढ़ के वर्तमान ज्वलंत सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था। कार्यक्रम की शुरुआत में समिति के अध्यक्ष आर.पी. शर्मा ने पी.वी. राजगोपाल तथा देश-प्रदेश से आए अन्य अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में समाज के सामने खड़ी तात्कालिक चुनौतियों को रेखांकित किया।

सत्र को संबोधित करते हुए पी.वी. राजगोपाल ने कहा कि आज के समय में अहिंसक संघर्ष और गांधीवादी सिद्धांतों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ की असली ताकत यहां का आदिवासी समाज और प्राकृतिक संसाधन हैं।

आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की सुरक्षा हर हाल में होनी चाहिए। हमें महात्मा गांधी के विचारों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर पुनः राज्य के गांवों, शहरों और विशेष रूप से युवा विद्यार्थियों तक ले जाने की आवश्यकता है ताकि एक जागरूक समाज का निर्माण हो सके।

आर.पी. शर्मा (अध्यक्ष, आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति) ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) केवल पत्थरों और लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि हमारे देश-प्रदेश की आर्थिक रीढ़ है।

वर्तमान परिस्थितियों में इसे सुरक्षित रखना और इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की दिशा में भी गंभीर प्रयास होने चाहिए, क्योंकि शराब सामाजिक और पारिवारिक विघटन का सबसे बड़ा कारण बन रही है।

शिक्षाविद प्रो. डी.एन. शर्मा ने कहा कि बस्तर का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब वहां की स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाए बिना आधुनिक सुविधाएं पहुंचाई जाएं। बस्तर में विमान (हवाई) सेवाओं का विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास स्वागत योग्य है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के आर्थिक-सामाजिक सशक्तीकरण और शैक्षणिक अवसरों पर भी समान ध्यान देना जरूरी है।

प्रशांत कुमार (एकता परिषद, छत्तीसगढ़) ने कहा कि आदिवासी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा के बिना किसी भी विकास मॉडल को सफल नहीं माना जा सकता।

जब तक आदिवासियों को अपनी जमीन और संसाधनों पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक उनका वास्तविक उत्थान संभव नहीं है। हमें जमीनी स्तर पर जाकर जन-अभियानों के माध्यम से उनके अधिकारों के प्रति अलख जगानी होगी।

बैठक के दौरान उपस्थित बुद्धिजिवियों और समाजशास्त्रियों ने सर्वसम्मति से कुछ प्रमुख बिंदुओं पर अपनी बात रखी। इनमें जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा। बस्तर क्षेत्र में पर्यटन और व्यापारिक संभावनाओं को बढ़ाने हेतु विमान सेवाओं का विस्तार।

समाज पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को देखते हुए राज्य में चरणबद्ध पूर्ण शराबबंदी लागू करने। स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों के बीच गांधी, जेपी और आचार्य नरेंद्र देव के विचारों पर नियमित संगोष्ठियों का आयोजन और सार्वजनिक क्षेत्र के इस ऐतिहासिक इस्पात संयंत्र को बचाए रखने हेतु साझा रणनीति बनाना शामिल है।

इस विचार-मंथन सत्र में प्रयोग आश्रम तिल्दा से सीताराम मंडावी, एकता परिषद से अरुण कुमार, प्रदीप कुमार दलाई, त्रिलोक मिश्रा, जीवन लाल यादव एवं अरुण कुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, समाजशास्त्री और गांधीवादी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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