क्रमिक हड़ताल का गढ़ बना भिलाई इस्पात संयंत्र

भिलाई(खबर वारियर)- भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका प्रथा बढ़ने के बाद शोषण की शिकायतों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। कम मजदूरी देना और मजदूरी देने के बाद वसूली का आरोप लगता रहा है। बीएसपी प्रबंधन से बार-बार शिकायत की जा चुकी। जिला प्रशासन और राज्य सरकार तक बात पहुंची, लेकिन कहीं से भी सख्ती नहीं हो सकी।
आवाज उठाने वालों की छंटनी की जा रही है। इसके खिलाफ भिलाई इस्पात संयंत्र के बाहर दो क्रमिक हड़ताल चल रही है। एक तरफ लोको चालक 70वें दिन रविवार को अपनी बहाल की मांग करते हुए क्रमिक हड़ताल पर बैठ रहे। दूसरी तरफ टाउनशिप के घर-घर से कचरा उठाने वाले सेक्टर-9 अस्पताल चौक पर क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
इन मजदूरों ने बीएसपी प्रबंधन को चेतावनी दे दी है कि चार जनवरी तक अगर, उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं की गई। काम से निकाले गए दो दर्जन से ज्यादा सफाई कामगारों की वापसी नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पांच जनवरी से शुरू कर दी जाएगी। परिवार के सदस्यों के साथ सफाई कामगार भूख हड़ताल पर बैठने का दावा कर रहे हैं।
वेतन से आधी रकम वापस मांगने का आरोप
हिंदुस्तान इस्पात ठेका श्रमिक यूनियन सीटू के बैनर तले सफाई कर्मियों द्वारा सेक्टर-9 चौक में क्रमिक भूख हड़ताल छठे दिन जारी रही। महासचिव योगेश कुमार सोनी का कहना है कि 26 श्रमिकों ने ठेकेदार द्वारा वेतन से आधा पैसा वापस मांगने का विरोध किया था। इस वजह से काम से निकाल गया। इसके खिलाफ व पुनः बहाली के लिए 29 दिसंबर से क्रमिक भूख हड़ताल की जा रही है।
कलेक्टर से मिलकर सुनाया दुखड़ा, आज भी बैठक
प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल दुर्ग के कलेक्टर सर्वेश्वर भूरे से मिला। ठेका यूनियन सीटू के पदाधिकारियों ने क्रमिक भूख हड़ताल में बैठे श्रमिकों का दुखड़ा सुनाया। समस्याओं को सज्ञान में लाते हुए जल्द निराकरण की मांग की। कलेक्टर को बताया गया कि क्रमिक भूख हड़ताल करने वाले कोरोना योद्घा कहे जाते हैं। श्रमिकों की समस्याओं पर चर्चा की गई। मांग पत्र सौंपा गया। कलेक्टर ने तत्काल श्रम आयुक्त आरके प्रधान से इस विषय पर चर्चा की। सोमवार को श्रम आयुक्त के साथ बैठक होगी।
इधर, लोको चालकों का 70वें दिन प्रदर्शन जारी
दो दर्जन से ज्यादा लोको चालकों को भिलाई इस्पात संयंत्र के ट्रांसपोर्ट एंड डीजल डिपार्टमेंट से निकाल दिया गया है। ठेकेदार के खिलाफ लगातार 70वें दिन मुर्गा चौक पर क्रमिक हड़ताल जारी रही। प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्री, सेल चेयरमैन, संयंत्र के मुखिया, संसद विजय बघेल, विधायक देवेंद्र यादव, केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।
राज्यपाल अनुसूइया उइके से भी प्रदर्शनकारी मुलाकात कर चुके हैं। श्रमिक नेता कलादास डेहरिया का कहना है कि संयंत्र के अंदर पीएफ, ईएसआई, न्यूनतम वेतन में घोटाले को उजागर करने के चलते मजदूरों को निकाला गया। लोको चालक इन्हीं घोटालों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग कर रहे हैं।



