छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने गैर शैक्षणिक कार्यो से शिक्षकों को मुक्त करने कलेक्टर से की मांग

रायपुर(खबर वारियर)राजधानी में लगातार कोरोना का ग्राफ बढ़ते जा रहा है, जिसके कारण प्रशासन ने घर घर जाकर कोरोना लक्षणों की जांच सर्वे,क्वारन्टीन,होम आइसोलेशन ड्यूटी आदि कोरोना महामारी सबंधित कार्यो के लिए जिले के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है,जिसके कारण विद्यालयों में प्रवेश कार्य, निशुल्क गणवेश-सायकल-पुस्तक वितरण,छात्रवृत्ति और मध्यान्ह भोजनराशन वितरण आदि कार्य बाधित हो रहे हैं।
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में प्रतिनिधमंडल ने रायपुर कलेक्टर से मुलाकात शिक्षकों को ग़ैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग की गई है।
प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि शिक्षकों की कर्मस्थली स्कूल है, और जब शिक्षा विभाग ने नया शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ होने की सूचना देते हुए प्रवेश,छात्रवृत्ति,निःशुल्क गणवेश-सायकल-पुस्तक,मध्यान्ह भोजन राशन वितरण आदि कार्य सम्पन्न करने का आदेश दिया है वही दूसरी ओर शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्य मे भी लगाई गई है,तथा राजधानी में लगातार कोरोना के केस गली मोहल्ले में बढ़ने के बावजूद शिक्षकों को घर घर कोरोना लक्षण सर्वे, गली मोहल्ले में पढ़ाने, जैसे कार्य कराए जा रहे हैं,जिसे मुक्त करने की मांग कलेक्टर से की गई है।
विदित हो कि पूर्व में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला ने सभी कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर कोरोना काल मे स्वेच्छा से शैक्षणिक कार्यों के सांथ नवाचार पर कार्य कर रहे शिक्षकों के प्रयासों को सराहा था।उन्होंने कहा था कि शिक्षकों को पूर्ण सहयोग दिया जाए,किंतु उन पर दबाव न बनाया जाए।उन्हें गैर शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त रखते हुए अन्य कार्यों में ड्यूटी न लगाए।
प्रतिनिधमंडल में महासचिव धर्मेश शर्मा,जिलाध्यक्ष भानु डहरिया,अब्दुल आसिफ खान,कृष्णराज पांडेय,घनश्याम पटेल आदि संगठन के पदाधिकारी सम्मिलित थे।



