रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी 6 अनिवार्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की किसान हितैषी नीतियों, वैज्ञानिकों के शोध और किसानों के अथक परिश्रम से आज भारत खाद्यान्न सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और पूर्ण आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर है। एक जमाना था जब देश आयातित गेहूं (PL-480) पर निर्भर था, लेकिन आज देश के अन्न भंडार लबालब भरे हुए हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने रेखांकित किया कि देश की 46% आबादी की आजीविका कृषि पर आधारित है और 86% किसान छोटे व सीमांत हैं, इसलिए सरकार का मूल ध्येय केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा और लाभकारी मूल्य दिलाना है।
लागत पर 50% से 106% तक का बंपर मार्जिन
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का स्पष्ट नीतिगत फैसला है कि किसानों को उनकी औसत उत्पादन लागत (A2+FL) पर कम से कम 50% या उससे अधिक का लाभ मिलना चाहिए। इसी क्रम में रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए घोषित एमएसपी में अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 50% से लेकर 106% तक का मार्जिन दिया गया है। इसमें किसानों को सबसे अधिक मार्जिन गेहूं पर 106%, रेपसीड एवं सरसों पर 96% और मसूर पर 92% सुनिश्चित किया गया है जिससे किसानों की शुद्ध आय में सीधा इजाफा होगा।

एमएसपी भुगतान और खरीद में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 2004-05 से 2013-14 में 6 प्रमुख रबी फसलों की एमएसपी खरीद पर कुल ₹2.65 लाख करोड़ का भुगतान किसानों को किया गया था। वहीं, मोदी सरकार के कार्यकाल (2014-15 से 2025-26) में यह राशि तीन गुना से भी अधिक बढ़कर ₹8.36 लाख करोड़ तक पहुंच गई है।
रबी फसलों की नई एमएसपी दरें: एक नजर में (सत्र 2027-28)
कैबिनेट निर्णय के अनुसार सभी 6 रबी फसलों की संशोधित एमएसपी दरें और वृद्धि इस प्रकार निर्धारित की गई हैं: कुसुम (Safflower): सबसे अधिक ₹675 प्रति क्विंटल की भारी वृद्धि, नई एमएसपी ₹7,215 प्रति क्विंटल। रेपसीड एवं सरसों (Rapeseed & mustard): ₹413 प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई एमएसपी ₹6,613 प्रति क्विंटल। मसूर (Lentil): ₹390 प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई एमएसपी ₹7,390 प्रति क्विंटल। जौ (Barley): ₹136 प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई एमएसपी ₹2,286 प्रति क्विंटल। चना (Gram): ₹83 प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई एमएसपी ₹5,958 प्रति क्विंटल। गेहूं (Wheat): ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी, नई एमएसपी ₹2,610 प्रति क्विंटल।
विपणन सीजन 2027-28 के लिए सभी रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य
(रुपये प्रति क्विंटल)
| क्र.सं. | फसलें | एमएसपी आरएमएस 2027-28 | उत्पादन की लागत* (आरएमएस)
2027-28 |
लागत की तुलना में मार्जिन
(प्रतिशत में) |
एमएसपी आरएमएस 2026-27 | एमएसपी में वृद्धि (पूर्ण) |
| 1 | गेहूं | 2610 | 1264 | 106 | 2585 | 25 |
| 2 | जौ | 2286 | 1447 | 58 | 2150 | 136 |
| 3 | चना | 5958 | 3751 | 59 | 5875 | 83 |
| 4 | मसूर | 7390 | 3854 | 92 | 7000 | 390 |
| 5 | रेपसीड और सरसों | 6613 | 3367 | 96 | 6200 | 413 |
| 6 | कुसुम | 7215 | 4810 | 50 | 6540 | 675 |
दलहन क्षेत्र में ऐतिहासिक उछाल: 35 गुना बढ़ी सरकारी खरीद
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि देश वर्तमान में लगभग 60 लाख मीट्रिक टन दालों का आयात करता है और कनाडा जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस विदेशी निर्भरता को समाप्त करने और ‘राष्ट्रीय दलहन मिशन’ को गति देने के लिए ही मसूर (₹390/क्विंटल) और चना (₹83/क्विंटल) की एमएसपी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है।
’राइस फेलो एरिया’ पहल: खाली खेतों में लहलहाएंगी दालें
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि घरेलू स्तर पर दलहन उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए कृषि मंत्रालय ने ‘राइस फेलो एरिया’ (धान कटाई के बाद खाली पड़े रहने वाले खेत) के उपयोग की विशेष योजना बनाई है। धान कटने के बाद जो जमीन खाली रह जाती है, उसमें किसानों को दलहनी फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मोदी सरकार दलहन मिशन के अंतर्गत ऐसे किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी परामर्श और कई तरह की वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है ताकि दलहन का रकबा तेजी से बढ़ सके।
तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता: विदेशी तेलों पर निर्भरता घटाने पर जोर
मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि खाद्य तेलों के आयात बिल को कम करने और देश को तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरसों और रेपसीड के समर्थन मूल्य में ₹413 प्रति क्विंटल की मजबूत बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही असिंचित, कम उपजाऊ और विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में पैदा होने वाली कुसुम (करड़ी) की फसल को बढ़ावा देने के लिए सबसे ज्यादा ₹675 प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है जिससे दूरदराज और सीमांत क्षेत्रों के किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो सके।
जौ का आयात रोकने और जल-संरक्षण को प्रोत्साहन
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने रेखांकित किया कि एक समय भारत जौ के मामले में आत्मनिर्भर था, लेकिन घरेलू उत्पादन घटने के कारण वर्ष 2025-26 में देश को 1.13 लाख मीट्रिक टन जौ का आयात करना पड़ा, चूंकि जौ बेहद कम पानी में तैयार होने वाली टिकाऊ फसल है, इसलिए किसानों को इसके उत्पादन के लिए प्रेरित करने हेतु इसकी एमएसपी में ₹136 प्रति क्विंटल की वृद्धि कर इसे ₹2,286 प्रति क्विंटल किया गया है।
क्षेत्रीय और जलवायु-अनुकूल रबी रणनीति: राज्यों के लिए अलग-अलग प्लान
चौहान ने बताया कि कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों के अधिकारियों और मंत्रियों के साथ गहन विचार-विमर्श और दक्षिण, मध्य व उत्तर क्षेत्रों में सम्मेलनों के बाद ‘स्टेट-स्पेसिफिक रबी प्लान’ तैयार किया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों के लिए जहां सूखे की स्थिति है, सूखा-प्रतिरोधी फसलों और विशेष उपायों की योजना बनाई गई है। वहीं, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे पर्याप्त जल उपलब्धता वाले राज्यों के लिए सघन उत्पादन केंद्रित रबी रणनीति लागू की जा रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का हर कदम अन्नदाता के कल्याण, उनके जीवन स्तर में सुधार और देश को कृषि क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनाने के लिए समर्पित है।



