
रायपुर (खबर वॉरियर) – संस्कृति सीखी जाती है, यह साझा की जाती है, ये प्रतीकात्मक, एकीकृत, गतिशील और परिवर्तनशील होती है!
बच्चों को सात्विक शिक्षा प्रदान कर उनका भावनात्मक व आध्यात्मिक विकास करने के मुख्य सैद्धांतिक उद्देश्य के साथ सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) की स्थापना भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन की गई है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए CCRT के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, उदयपुर (राजस्थान) में ‘विद्यालयी शिक्षा में हस्तकला कौशल के समावेश’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
भारतीय ज्ञान परंपरा एवं NEP से जुड़े देशभर के 95 शिक्षक
प्राकृतिक अवशेषों से खिलौने व कलाकृति, मिट्टी के बर्तन व कलाकृति, कपड़े की बंधेज या बांधनी, अनगढ़ पत्थर से शिल्पकारी, मांडना चित्रकला जैसी कारीगरी में सक्रिय भागीदारी के साथ छत्तीसगढ़ के बालोद से ईश्वरी कुमार सिन्हा, गोविंद सिंह नागवंशी, बलौदाबाजार से गौसिया परवीन, बेमेतरा से प्रतीक सिंह, दंतेवाड़ा से कीर्ति साहू, दुर्ग से स्मृति दुबे, धमतरी से प्रमोद कुमार धुर्वे, नेमलाल गंगेले, कुमारी साहू, स्कंध शेष, कविता साहू, खैरागढ़ से राजेश्वरी पटेल, महासमुंद से गुणसागर प्रधान, मनेन्द्रगढ़ से सूर्योदय सिंह, रायपुर से अनीता ठाकुर सहित देशभर के 13 राज्यों – आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल से 95 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने 10 दिनों तक भारत की क्षेत्रीय संस्कृतियों की बहुलता के विषय में जागृति व समझ उत्पन्न कर शिक्षा प्रणाली में अंतर्निहित एवं एकीकृत करने का अध्ययन किया।

सैद्धांतिक, प्रायोगिक व प्रत्यक्ष अवलोकन युक्त कार्यशाला ने कराया शिक्षकीय गरिमा का अहसास
संस्कृति का शिक्षा में समावेश क्यों? NEP और धरोहर शिक्षा, भारतीय शिल्प में सौंदर्य-बोध, खेल आधारित शिक्षण, संस्कृति तत्व का जुड़ाव अपनी कक्षा में, भारतीय ज्ञान परंपरा में वसुधैव कुटुम्बकम्, बुनियादी शिक्षा, स्कूली पाठ्यक्रम में शिल्प को शामिल करना, राष्ट्रीय एकता में संगीत व प्रतीकों का महत्व, कंप्यूटर में वॉइस टाइपिंग, विद्यालय में सांस्कृतिक क्लब व सिद्धि समारोह जैसे गूढ़ रहस्यों तथा सहेलियों की बाड़ी, भारतीय लोक कला मंडल संग्रहालय व कठपुतली नृत्य, भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र व शिल्पग्राम के प्रत्यक्ष अवलोकन ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को आत्मचिंतन करने को प्रेरित किया।
शिक्षकों ने जताया आभार, जमीनी क्रियान्वयन का लिया संकल्प
इस राष्ट्रीय कार्यशाला की सफलता और उत्कृष्ट समन्वय हेतु भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय, CCRT उदयपुर के क्षेत्रीय अधिकारी अभीक सरकार, प्रशिक्षण समन्वयक हितेश पानीरी, विशेषज्ञों डॉ. एमपी शर्मा, प्रो. प्रेम भंडारी, सुनील भंडारी, डॉ. डॉली मोगरा, निलांजन खटुआ, डॉ. गुंजन शर्मा, गिरिराज पालीवाल व समस्त सहयोगी कर्मचारी सहित छत्तीसगढ़ राज्य शासन व स्कूल शिक्षा विभाग के साथ किरण कौशल (आयुक्त, राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा), दिनेश कौशिक (उप संचालक), मंजूलता साहू (सहायक संचालक), राखी सिन्हा (सहायक कार्यक्रम समन्वयक), डीईओ, डीएमसी, बीईओ, बीआरसीसी व अपने संस्था प्रमुख को कुशल मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन के लिए छत्तीसगढ़ दल ने आभार व्यक्त किया है।
इन शिक्षकों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप मिले अनुभव और ज्ञान को कार्यक्षेत्र में विद्यार्थियों व समुदाय के साथ मिलकर बेहतर क्रियान्वित करने का संकल्प लिया है।



